कोरोना : विदेशों की तीसरी लहर से भारत को खतरा नहीं, आईआईटी के वैज्ञानिक का दावा

यूरोप समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर भले ही कहर बरपा रही हो पर भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि वहां का प्रभाव अपने देश में नहीं पड़ेगा। यह दावा कानपुर आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक व पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने किया है। उनका कहना है कि उन देशों में तीसरी लहर का मुख्य कारण डेल्टा वेरिएंट है। यह वही वेरिएंट है, जिसके प्रभाव से भारत में दूसरी लहर आई थी।

प्रो. मणींद्र ने गणितीय मॉडल सूत्र के जरिए विभिन्न देशों में फैले संक्रमण के साथ देश में चल रहे वैक्सीनेशन के आधार पर नई स्टडी की है। इस अध्ययन के मुताबिक भारत में कोरोना की तीसरी लहर अभी नहीं आई है। उनका दावा है कि यह पहली लहर की तरह ही होगी। उन्होंने कहा कि जिन देशों में तीसरी लहर आई है, वहां इसका बड़ा कारण डेल्टा वेरिएंट है जबकि इंडिया में डेल्टा के कारण बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो चुके हैं और उनमें हर्ड इम्युनिटी बन चुकी है। इसलिए तीसरी लहर अधिक खतरनाक नहीं होगी। 

प्रो. अग्रवाल के मुताबिक वर्तमान में जो वेरिएंट प्रभावी है, उसकी वजह से देश में तीसरी लहर नहीं आएगी। अगर अगस्त अंत तक डेल्टा वेरिएंट की तरह तेजी से फैलने वाला कोई नया वेरिएंट आता है तो अक्तूबर अंत तक तीसरी लहर आने की उम्मीद है। अगर ऐसा कोई वेरिएंट नहीं आता है तो तीसरी लहर अधिक प्रभावी नहीं होगी।

संक्रमित हो चुकी 20 फीसदी आबादी पर अधिक खतरा
प्रो. अग्रवाल के मुताबिक कोरोना को लेकर कई स्टडी चल रही हैं। इन्हीं के मुताबिक कहा जा रहा है कि संक्रमित हो चुके लोगों में से 20 फीसदी में इम्युनिटी काफी कमजोर हो जाती है। ऐसे लोगों को फिर संक्रमण होने का खतरा रहेगा। इसलिए मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग के साथ वैक्सीनेशन जरूर कराएं।

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